मरने से पहले एक वादा – निधि कारिया
कैसा हो जब कोई कहे,
मरने से पहले एक वादा करो…
जाने के बाद भी यूँ लगे,
हर पल मेरे ही साथ रहो…
तुम्हारे जाने का कभी एहसास न हो,
हर धड़कन में बस तुम्हारा नाम हो।
तुमसा न कोई पहले था,
ना तुम्हारे बाद कोई और हो…
तुम्हारी हँसी मेरी सुबह बन जाए,
तुम्हारी बातें मेरी शाम हो।
जब भी आँखें बंद करूँ मैं,
बस तुम्हारा ही एक ख़्वाब हो।
ना छू सकूँ, ना देख सकूँ,
फिर भी तुम मेरे पास हो।
मेरी हर ख़ामोशी में,
तुम्हारी ही आवाज़ हो।
कैसा हो जब कोई कहे,
मरने से पहले एक वादा करो…
जाने के बाद भी यूँ लगे,
हर पल मेरे ही साथ रहो…
तुमसा ना कोई और चाहिए था,
ना तुम्हारे बाद कोई मिलेगा।
मेरी हर साँस में बस तुम रहना,
यही दिल हर दुआ में लिखेगा।
तुम्हारा हर एहसास बन जाए,
मेरी अधूरी-सी साँसों का सहारा।
बाकी जो ज़िंदगी बची है,
वो कट जाए लेकर नाम तुम्हारा।
अगर कभी तारे टूटकर गिरें,
समझूँ तुम मिलने आए हो।
हवा जो हल्के से छू जाए,
समझूँ तुम मुस्कुराए हो।
मरने से पहले बस इतना वादा करो,
जाने के बाद भी मुझसे जुदा ना हो।
मेरे हर दर्द में, हर खुशी में,
तुम मेरी रूह का हिस्सा हो।
तुम्हारा हर एहसास ही,
मेरी अधूरी साँस हो…
और वही मेरी बाकी ज़िंदगी का,
सबसे खूबसूरत साथ हो…
——–
लेखिका: सुश्री निधि कारिया, दुबई (UAE)
“मरने से पहले एक वादा” सुश्री निधि कारिया द्वारा लिखी गई एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली कविता है, जो सच्चे प्रेम, आत्मीय जुड़ाव और यादों की अमरता को खूबसूरती से व्यक्त करती है। इस कविता में लेखिका उस प्रेम की कल्पना करती हैं जो केवल जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मृत्यु के बाद भी एहसासों, यादों और धड़कनों में जीवित रहता है।
कविता का प्रत्येक शब्द इस भावना को दर्शाता है कि सच्चा प्रेम कभी समाप्त नहीं होता। चाहे व्यक्ति इस दुनिया में रहे या न रहे, उसका साथ, उसकी मुस्कान, उसकी बातें और उसकी यादें जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी रहती हैं। लेखिका ने सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में प्रेम, विरह, समर्पण और आत्मिक संबंध की गहराई को प्रस्तुत किया है, जो हर पाठक के हृदय को स्पर्श करती है।
यह कविता उन सभी लोगों के लिए एक भावनात्मक संदेश है, जिन्होंने अपने जीवन में किसी को सच्चे दिल से चाहा है। यह हमें सिखाती है कि प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि किसी के एहसास को जीवनभर अपने भीतर संजोकर रखने का नाम है।












